बता दें की ऐसे आवेदनों को अब केवल तारीख या तकनीकी कारणों से खारिज नहीं किया जा सकेगा। रेलवे बोर्ड का यह निर्देश देश के सभी जोनल रेलवे पर समान रूप से लागू होगा। इससे उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिनके आवेदन पहले नियमों की गलत व्याख्या के कारण अटक रहे थे।
क्या है रेलवे बोर्ड का नया स्पष्टीकरण?
रेलवे बोर्ड ने आरबीई संख्या 08/2026 के तहत यह स्पष्ट किया है कि पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों को गलत तरीके से समझा और लागू किया जा रहा था। इसी वजह से कई मामलों में अनावश्यक कानूनी विवाद पैदा हुए और रेलवे को प्रतिकूल न्यायिक फैसलों का सामना करना पड़ा। बोर्ड ने अपने पत्र में यह भी स्वीकार किया है कि नियमों की गलत व्याख्या से पात्र आवेदकों को नुकसान हो रहा था, जिसे अब दूर करने की कोशिश की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
रेलवे बोर्ड ने अपने सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले ‘वी.आर. त्रिपाठी बनाम भारत संघ’ का उल्लेख किया है। इस फैसले के आधार पर यह व्यवस्था 11 दिसंबर 2018 से प्रभावी मानी गई है। इसी निर्णय के तहत दूसरी पत्नी से जन्मे बच्चों को अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया था, जिसे अब स्पष्ट रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
देरी से आए आवेदनों पर भी विचार
रेलवे बोर्ड ने यह भी कहा है कि यदि किसी आवेदन में देरी हुई है, तो उसे केवल इसी आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। सक्षम प्राधिकारी को प्रत्येक मामले का गुण-दोष के आधार पर परीक्षण करना होगा। तकनीकी खामियों या तारीखों के आधार पर आवेदनों को अस्वीकार करने से बचने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्देश उन परिवारों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे।
सभी जोनल रेलवे को सख्त निर्देश
रेलवे बोर्ड ने देशभर के सभी संबंधित रेलवे प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे लंबित मामलों की दोबारा समीक्षा करें, नए आवेदनों में भी इस स्पष्टीकरण का पालन करें, पात्र उम्मीदवारों को न्याय सुनिश्चित करें।
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