नीतीश सरकार का बड़ा फैसला! अनुमंडल स्तर पर बना नया पद

पटना। बिहार में भूमि और राजस्व प्रशासन को लेकर चल रहे लंबे विवाद के बीच नीतीश सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के पद पर तैनाती को लेकर बिहार प्रशासनिक सेवा और बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के बीच चल रहे टकराव के समाधान की दिशा में सरकार ने अनुमंडल स्तर पर एक नया पद बना दिया है। इस नए पद को अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी का नाम दिया गया है।

सरकार ने इसके लिए बिहार राजस्व सेवा नियमावली, 2010 में संशोधन किया है, जिसकी अधिसूचना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी कर दी गई है। साफ तौर पर तय किया गया है कि इस पद पर केवल बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी ही तैनात किए जाएंगे। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार राजस्व सेवा के अधिकारियों को उनकी मूल भूमिका और अधिकार देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी की जिम्मेदारियां तय

नए पद के साथ सरकार ने आठ प्रमुख कार्य भी निर्धारित किए हैं। इनमें अंचल स्तर पर होने वाले कार्यों का पर्यवेक्षण, राजस्व संग्रह, ऑनलाइन राजस्व प्रबंधन, सरकारी भूमि की सुरक्षा, लोक प्रयोजन के लिए भूमि उपलब्ध कराना, आपदा प्रबंधन और विशेष अभियानों का संचालन शामिल है। इसके अलावा जन शिकायतों की सुनवाई और अर्द्ध-न्यायिक मामलों का निपटारा भी इस पदाधिकारी की जिम्मेदारी होगी।

राजस्व सेवा की पृष्ठभूमि और विवाद की जड़

बिहार राजस्व सेवा का गठन वर्ष 2010 में इस उद्देश्य से किया गया था कि भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों के लिए एक अलग संवर्ग तैयार किया जाए। इससे पहले अंचलाधिकारी, डीसीएलआर और भूमि अर्जन पदाधिकारी जैसे पदों पर केवल बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की ही तैनाती होती थी। तय किया गया था कि राजस्व सेवा के अधिकारियों की शुरुआत अंचलाधिकारी के पद से होगी और प्रोन्नति के बाद उन्हें उच्च पदों पर जिम्मेदारी दी जाएगी।

हालांकि व्यवहार में ऐसा पूरी तरह नहीं हो सका। अंचलाधिकारी के बाद का महत्वपूर्ण पद डीसीएलआर होता है। राज्य में कुल 101 अनुमंडल हैं, जहां डीसीएलआर की तैनाती होती है। अब जबकि बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी 15 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं और डीसीएलआर समेत उच्च पदों के लिए योग्य हो चुके हैं, इसके बावजूद अधिकतर पदों पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ही बने हुए हैं।

हाई कोर्ट में लंबित है मामला

पिछले साल जून में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को डीसीएलआर के पद पर बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों की तैनाती का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक इस आदेश पर पूरी तरह अमल नहीं हो सका है। अगली सुनवाई फरवरी में होनी है, जहां सरकार को यह बताना होगा कि आदेश लागू करने में उसे किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे में अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी का नया पद बनाना सरकार की रणनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे न सिर्फ प्रशासनिक संतुलन बनेगा, बल्कि राजस्व सेवा के अधिकारियों को भी उनकी भूमिका के अनुरूप जिम्मेदारी और सम्मान मिल सकेगा।

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