MSP में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
इस बार का MSP पिछले सीजन की तुलना में 275 रुपए प्रति क्विंटल अधिक रखा गया है। सरकार ने इसे 2018-19 की नीति के अनुरूप तय किया, जिसमें कहा गया था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना होना चाहिए। 2014-15 में जूट का MSP 2,400 रुपए प्रति क्विंटल था। अब यह 5,925 रुपए तक पहुँच गया है, यानी लगभग 2.5 गुना बढ़ोतरी। यह लगातार बढ़ते MSP से किसानों को लंबे समय तक लाभ सुनिश्चित होता है।
किसानों की आमदनी में सुधार
MSP बढ़ने से जूट उगाने वाले किसानों की आमदनी में सुधार होगा और वे अपनी फसल का बेहतर मूल्य पा सकेंगे। पिछले दशक में सरकार ने जूट किसानों को MSP के माध्यम से लगातार वित्तीय समर्थन दिया है। 2014-15 से 2025-26 के बीच कुल 1,342 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह राशि 441 करोड़ रुपए थी। केंद्रीय जूट कॉरपोरेशन (JCI) इस प्रक्रिया की निगरानी करेगा। अगर कोई नुकसान होता है, तो उसे सरकार द्वारा पूरी तरह से पूरा किया जाएगा।
उत्पादन और उद्योग को मिलेगा फायदा
जूट केवल कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि कई उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल भी है। बैग, रस्सी, कारपेट और अन्य उत्पादों के निर्माण में इसका इस्तेमाल होता है। MSP बढ़ने से किसान अधिक उत्पादन करेंगे और गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके अलावा, जूट उद्योग को भी मजबूती मिलेगी और देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और कृषि एवं उद्योग दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
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