2477 नलकूपों को मिलेगा जीवनदान
राज्य में वर्तमान समय में 3304 राजकीय नलकूप चालू स्थिति में नहीं हैं। जारी की गई राशि से 2477 नलकूपों को संचालन योग्य बनाया जाएगा। शेष नलकूपों को सक्रिय करने के लिए सरकार बाद में अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराएगी। इस पहल से हजारों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई का प्रमुख साधन नलकूप ही है।
पंचायतों को सौंपी गई जिम्मेदारी
राजकीय नलकूप लघु जल संसाधन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हालांकि, इनके प्रबंधन, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्थानीय पंचायतों को दी गई है। मरम्मत और देखरेख के लिए आवश्यक राशि भी सीधे पंचायतों को उपलब्ध कराई जाती है। सरकार की ओर से फिलहाल नलकूपों के संचालन के लिए अलग से ऑपरेटर नियुक्त करने की कोई योजना नहीं है। पंचायतें ही स्थानीय स्तर पर इनके संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगी।
घटती संख्या बनी चिंता का विषय
एक समय बिहार में 10,240 राजकीय नलकूप हुआ करते थे। समय के साथ इनमें से कई तकनीकी खराबी और उपेक्षा के कारण बंद हो गए। वर्तमान में राज्य में 8,922 नलकूप ही शेष रह गए हैं। कुछ वर्ष पहले तक इनमें से 5,340 से अधिक नलकूप यांत्रिक एवं विद्युत दोष के कारण ठप पड़े थे। पिछले वर्षों में पंचायतों द्वारा कई नलकूपों की मरम्मत कर उन्हें पुनः चालू किया गया। अब सरकार की नई पहल से शेष नलकूपों को भी सक्रिय करने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
नलकूपों के चालू होने से खेती की लागत में कमी आएगी और फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी। वर्षा पर निर्भरता कम होगी और सिंचाई की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी। यह कदम ‘हर खेत को पानी’ की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। राज्य सरकार की इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में यदि शेष नलकूप भी सक्रिय हो जाते हैं, तो बिहार में सिंचाई व्यवस्था को नई गति मिल सकती है।

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