आपको बता दें की उत्तर प्रदेश में कुल 104 डिस्टलरियां संचालित होती हैं, जिनमें करीब 45 हजार कर्मचारी काम करते हैं। कर्मचारियों को बढ़े हुए वेतन का लाभ तब मिलेगा जब उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव श्रम अपने हस्ताक्षर करेंगे।
वेतन वृद्धि क्यों हुई जरूरी?
डिस्टलरी कर्मचारियों का वेतन सितंबर 2022 में रिवाइज होना था, लेकिन विभिन्न कारणों से यह लंबित रहा। पिछले महीने श्रमायुक्त की अध्यक्षता में तीन पक्षीय बैठक हुई, जिसमें कर्मचारियों की ओर से ट्रेड यूनियन, फैक्ट्री प्रबंधन और श्रम विभाग के अधिकारी शामिल थे। बैठक के बाद कर्मचारियों के वेतन में 2,100 रुपये की वृद्धि पर आम सहमति बन गई।
न्यूनतम और अधिकतम वेतन
उत्तर प्रदेश डिस्टलरी मजदूर संघ के महामंत्री के अनुसार, वेतन वृद्धि के बाद कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 22 से 23 हजार रुपये प्रति माह होगा। वहीं, सुपरवाइजर स्तर पर अधिकतम वेतन 28 से 30 हजार रुपये तक पहुंच जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में उत्पादों पर अंकित एमआरपी का 50 से 65 प्रतिशत टैक्स डिस्टलरी कंपनियों द्वारा सरकार को दिया जाता है। बावजूद इसके कर्मचारियों को लंबे समय तक उचित वेतन नहीं मिलता था।
डिस्टलरी उद्योग और निवेश को बढ़ावा
योगी सरकार नई आबकारी नीति 2026-27 पर भी काम कर रही है। नई नीति के तहत राज्य में डिस्टलरी प्लांट स्थापित करने को प्रोत्साहन मिलेगा और निर्यात बढ़ाने के लिए विभिन्न सुविधाओं पर विचार किया जा रहा है। इस कदम से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राज्य के राजस्व संसाधनों को भी सशक्त किया जा सकेगा। सरकार का यह फैसला न केवल कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है, बल्कि डिस्टलरी उद्योग को मजबूत बनाने और राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए भी अहम माना जा रहा है।
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