पुश्तैनी संपत्ति के कानून: जानें परिवार में किसका हक़ है?

नई दिल्ली: पुश्तैनी संपत्ति यानी वह जमीन या भवन जो परिवार के पूर्वजों से विरासत में मिली हो, अक्सर परिवार में विवाद का कारण बन जाती है। ऐसे मामलों में यह समझना जरूरी है कि कानून के नजरिए से किसका अधिकार है और किसे हिस्सा मिलने का हक़ है।

पुरुष और महिलाओं का अधिकार

भारतीय संपत्ति कानून के अनुसार, चाहे संपत्ति पिता से आई हो या दादा-दादी से, सभी वारिसों को हिस्सा मिलना तय है। आधुनिक कानून में महिलाओं को भी बराबरी का अधिकार है। यानी बेटी, पुत्र सभी अपनी हिस्सेदारी के हक़दार हैं।

भाइयों और बहनों के बीच बंटवारा

पुश्तैनी जमीन में भाई-बहनों के बीच हिस्सा समान रूप से बांटा जाता है। अगर पिता के समय कोई लिखित वसीयत नहीं है, तो जमीन का वितरण हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार समान रूप से होगा।

वसीयत और अधिकार

अगर पूर्वज ने वसीयत बनाई हो, तो उसके मुताबिक संपत्ति का वितरण किया जाएगा। लेकिन ध्यान रखें कि वसीयत में कानूनी खामियां या किसी वारिस की सहमति का अभाव विवाद को जन्म दे सकता है। ऐसे मामलों में अदालत हस्तक्षेप कर सकती है।

संयुक्त परिवार में अधिकार

संयुक्त परिवार की संपत्ति में भी हक़ बराबर का माना जाता है। किसी भी सदस्य को बिना सहमति संपत्ति का एकल अधिकार नहीं दिया जा सकता। विवाद होने पर पारिवारिक सुलह या न्यायालय के माध्यम से समाधान संभव है।

विवाद से बचने के उपाय

पुश्तैनी संपत्ति के विवाद से बचने के लिए परिवार के सभी सदस्य को खुलकर चर्चा करनी चाहिए। जमीन या भवन का आधिकारिक रिकॉर्ड रखना और वसीयत बनवाना, दोनों ही मामलों में सुरक्षा और स्पष्टता लाता है।

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