पिछली नीति और उसका असर
पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले तबादला नीति का मसौदा पेश किया गया था, जिसमें नियुक्ति की तारीख से अगले पांच साल तक किसी भी शिक्षक का ट्रांसफर न करने का प्रावधान था। इस सख्त नियम के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने विरोध किया था, जिसके बाद नीति को फिर से समीक्षा के लिए लौटाना पड़ा।
तीन साल की सेवा अनिवार्य
नई मसौदे के अनुसार, शिक्षक को अपनी नियुक्ति के बाद कम से कम तीन साल एक ही स्कूल में सेवा देनी होगी। हालांकि, गंभीर बीमारी, पारिवारिक आपात स्थिति या अन्य विशेष परिस्थितियों में तीन साल से पहले भी तबादले की अनुमति रहेगी। इस नीति का असर लगभग छह लाख शिक्षकों पर पड़ेगा।
व्यवस्था के लिए कमेटियां
जिलास्तरीय शिक्षकों के तबादले के लिए जिलाधिकारी की देखरेख में आठ सदस्यीय कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें उप विकास आयुक्त, एडीएम और जिला शिक्षा अधिकारी शामिल होंगे। वहीं, प्रधानाध्यापक और प्रमंडल स्तर के शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी गठित होगी।
इस नियम से क्या होगा फायदा?
शिक्षा विभाग का कहना है कि नई नीति से तबादले की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। इससे न केवल प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान भी आसान होगा। नीति लागू होने के बाद स्कूलों में स्थायित्व और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।
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