बिहार में शिक्षक-कर्मचारियों की पेंशन अटकी, जानें डिटेल

पटना। बिहार में कई विश्वविद्यालयों में सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी अपनी पेंशन पाने के लिए इंतजार कर रहे हैं। कारण है उपयोगिता प्रमाण-पत्र (UC) का समय पर या सही तरीके से जमा न होना। वित्त विभाग ने इसके बिना पेंशन की राशि जारी नहीं करने का निर्णय लिया है। इस वजह से लगभग 50 हजार पेंशनधारक जनवरी माह की पेंशन से वंचित रह गए हैं।

प्रमाण-पत्र की जरूरत

वित्त विभाग ने पिछली जारी राशि के लिए विश्वविद्यालयों से यह दस्तावेज लगभग डेढ़ साल पहले मांगा था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दी गई धनराशि सही ढंग से उपयोग हुई। हालांकि कई विश्वविद्यालयों ने प्रमाण-पत्र भेजा, लेकिन उनमें त्रुटियां या अधूरापन पाया गया, जिसके चलते फाइल आगे नहीं बढ़ सकी।

प्रभावित लोग और संख्या

उच्च शिक्षा विभाग ने पेंशन की राशि मंजूर कराने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा था। लेकिन UC का अभाव होने से प्रक्रिया रुकी रही। इस कारण राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और उनके अंगीभूत कॉलेजों के लगभग 50 हजार सेवानिवृत्त शिक्षक-कर्मचारी पेंशन प्राप्त नहीं कर पाए।

समाधान कब होगा?

वित्त विभाग ने कहा है कि जैसे ही सभी विश्वविद्यालय सही और पूर्ण उपयोगिता प्रमाण-पत्र भेजेंगे, पेंशन भुगतान की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाएगी। इसके लिए विभाग लगातार विश्वविद्यालयों को नोटिस और अनुस्मारक भेज रहा है। तब तक सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी पेंशन के लिए इंतजार करते रहेंगे।

संकट प्रभावित विश्वविद्यालय

इस समस्या से प्रभावित विश्वविद्यालयों में पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, बी. आर. ए. बिहार विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, भागलपुर विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय और मौलाना मजहरुल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय शामिल हैं।

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