क्या है टेस्टोस्टेरोन की कमी?
चिकित्सकीय भाषा में इसे “लो टेस्टोस्टेरोन” या “हाइपोगोनाडिज़्म” कहा जाता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका स्तर स्वाभाविक रूप से घटता है, लेकिन कई बार तनाव, मोटापा, मधुमेह, हार्मोनल गड़बड़ी या कुछ दवाओं के कारण भी यह कमी समय से पहले हो सकती है।
आम लक्षण
1. लगातार थकान: पर्याप्त आराम के बाद भी शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना इसका शुरुआती संकेत हो सकता है।
2. मांसपेशियों में कमजोरी: मसल मास कम होना और ताकत में गिरावट अक्सर लो टेस्टोस्टेरोन से जुड़ी होती है।
3. यौन इच्छा में कमी: लिबिडो का कम होना या यौन प्रदर्शन में गिरावट भी एक प्रमुख लक्षण है।
4. मूड में बदलाव: चिड़चिड़ापन, उदासी या हल्के अवसाद जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
5. वजन बढ़ना: खासकर पेट के आसपास चर्बी बढ़ना हार्मोन असंतुलन का संकेत हो सकता है।
गंभीर लक्षण
1. हड्डियों का कमजोर होना: टेस्टोस्टेरोन हड्डियों की घनत्व बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है।
2. बांझपन की समस्या: स्पर्म काउंट में कमी आ सकती है, जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।
3. स्तन ऊतक का बढ़ना: कुछ मामलों में पुरुषों में गायनेकोमैस्टिया (स्तन ऊतक का असामान्य विकास) देखा जा सकता है।
4. याददाश्त और एकाग्रता में कमी: ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और मानसिक सुस्ती भी जुड़ी हो सकती है।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
यदि ऊपर बताए गए लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो हार्मोन जांच कराना जरूरी है। सुबह के समय रक्त जांच से टेस्टोस्टेरोन स्तर का सही आकलन किया जाता है। बिना चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट या इंजेक्शन लेना नुकसानदेह हो सकता है।
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