ग्रामीण और शहरी खपत में बढ़त
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खरीददारी और सेवा-संबंधी गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र दोनों में सकारात्मक रुझान के कारण ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ी है। शहरी इलाकों में भी त्योहारी सीजन के बाद से खर्च में वृद्धि देखी जा रही है, जो सरकारी प्रोत्साहनों से और मजबूत हुई है।
नई GDP गणना और आधार वर्ष
भारत जल्द ही GDP गणना का आधार वर्ष बदल रहा है। पुराने 2011-12 आधार वर्ष की जगह अब 2022-23 को आधार बनाया जाएगा। इसका मकसद डिजिटल व्यापार, सेवा क्षेत्र और अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से मापना है। साथ ही, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का आधार वर्ष भी 2024 कर दिया गया है।
आधुनिक डेटा स्रोतों का इस्तेमाल
नई गणना पद्धति में GST रिकॉर्ड, ई-वाहन रजिस्ट्रेशन और प्राकृतिक गैस की खपत जैसे डेटा स्रोत शामिल होंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बदलाव से GDP आंकड़े अधिक सटीक होंगे और भारत जल्द ही दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ सकता है।
वैश्विक तुलना में भारत की रफ्तार
जहाँ दुनिया की विकास दर अगले दो सालों में लगभग 3.3% रहने का अनुमान है, वहीं भारत 8% के करीब बढ़ने की ओर अग्रसर है। भू-राजनीतिक चुनौतियों और कर्ज बढ़ने के बावजूद यह तेजी देश की आर्थिक मजबूती का संकेत है।

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