मिस-सेलिंग पर बढ़ती सख्ती
बीते वर्षों में यह शिकायतें बढ़ी हैं कि कई बैंक लोन या अन्य सेवाओं के साथ बीमा पॉलिसी और निवेश उत्पाद “अनिवार्य” बताकर बेचते हैं, जबकि ग्राहक को उनकी वास्तविक जरूरत नहीं होती। कई मामलों में ग्राहक के पास पहले से बीमा कवर होने के बावजूद उसे नई पॉलिसी लेने के लिए दबाव डाला जाता है।
नए ड्राफ्ट नियम क्या कहते हैं?
11 फरवरी को भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘मिस-सेलिंग’ पर कड़े ड्राफ्ट नियम जारी किए। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार:
यदि किसी बैंक ने ग्राहक को गलत या भ्रामक जानकारी देकर कोई उत्पाद बेचा है, तो उसे पूरी राशि वापस करनी होगी।
ग्राहक को हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई भी बैंक को करनी पड़ेगी।
नियम लागू होने के बाद जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और सख्त होगी।
ये नियम 1 जुलाई से प्रभावी होने की तैयारी में हैं, जिससे बैंकों की बिक्री पद्धतियों पर सीधा असर पड़ेगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
बैंकिंग प्रणाली भरोसे पर चलती है। जब ग्राहक होम लोन के लिए अपनी संपत्ति गिरवी रखता है, तो उससे अतिरिक्त बीमा लेने का दबाव नैतिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से सवाल खड़े करता है। ऐसी प्रथाएं अल्पकालिक लाभ तो दे सकती हैं, लेकिन दीर्घकाल में ग्राहक विश्वास को नुकसान पहुंचाती हैं।
वित्त मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि बैंकों को अपने मूल कारोबार जमा जुटाने, विशेषकर सेविंग्स और करंट अकाउंट डिपॉजिट बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यही मजबूत बैंकिंग ढांचे की आधारशिला है। यदि बैंक पारदर्शिता, स्पष्ट संचार और ग्राहक की सहमति को प्राथमिकता देंगे, तो न केवल शिकायतें घटेंगी बल्कि उनकी विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
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