यह प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय की ओर से परिवहन विभाग को भेजा जा चुका है और सर्वे का काम भी संपन्न हो चुका है। मंजूरी मिलते ही इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि यह पहल न केवल ट्रैफिक नियमों के पालन को सख्त बनाएगी, बल्कि जाम की समस्या को भी काफी हद तक कम करेगी।
कैसे काम करेगा एडेप्टिव एआई सिस्टम?
यह सिस्टम पारंपरिक सीसीटीवी से अलग होगा। सामान्य कैमरे सिर्फ रिकॉर्डिंग करते हैं, जबकि एआई कैमरे रीयल-टाइम डेटा का विश्लेषण करेंगे। जिस दिशा में वाहनों की संख्या अधिक होगी, वहां सिग्नल की अवधि स्वतः बढ़ जाएगी। कम ट्रैफिक वाली दिशा में सिग्नल जल्दी बदलेगा। इससे अनावश्यक रुकावट कम होगी और ट्रैफिक फ्लो सुचारु रहेगा।
14 तरह के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई
एआई कैमरे सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं रहेंगे। नियम तोड़ते ही स्वतः ई-चालान जारी होगा। इनमें शामिल हैं: हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, ट्रिपल राइडिंग और अन्य प्रमुख यातायात उल्लंघन। इससे मानव हस्तक्षेप कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
हादसों में कमी की उम्मीद
एडीजी ट्रैफिक के अनुसार, एआई आधारित निगरानी से सड़क दुर्घटनाओं में करीब 25 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। साथ ही, जुर्माना वसूली में 50 प्रतिशत तक सुधार की संभावना जताई गई है। यदि यह परियोजना सफल रही, तो बिहार की ट्रैफिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।

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