चार नए लेबर कोड और उनका उद्देश्य
1 .वेतन कोड – कर्मचारियों को समय पर और पारदर्शी वेतन सुनिश्चित करना।
2 .सामाजिक सुरक्षा कोड – पेंशन, बीमा और अन्य सुरक्षा लाभ के दायरे को बढ़ाना।
3 .इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड – कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच विवादों को नियंत्रित और सुलझाने की प्रक्रिया को आसान बनाना।
4 .ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन्स कोड – कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर कार्य स्थितियों को सुनिश्चित करना। इन कोड्स के माध्यम से सरकार ने कामकाजी व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने का प्रयास किया है।
काम के घंटे और ओवरटाइम में बदलाव
नए नियमों के तहत रोजाना काम का समय 8 घंटे और साप्ताहिक 48 घंटे रहेगा। हालांकि, अब कंपनियां कर्मचारियों को फ्लेक्सिबल वर्किंग मॉडल प्रदान कर सकेंगी। इसका मतलब है कि कर्मचारी अपनी सुविधानुसार काम के घंटों का प्रबंधन कर सकते हैं, और अतिरिक्त घंटे काम करने पर उचित ओवरटाइम लाभ मिलेगा। यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप बनाई गई है, जिससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को संतुलन मिलेगा।
सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
नई व्यवस्था के तहत अब लगभग 100 करोड़ श्रमिक सामाजिक सुरक्षा लाभ के अंतर्गत आएंगे। वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 94 करोड़ है। इसमें असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर, तथा स्वरोजगार करने वाले लोग भी शामिल होंगे। सरकार ने इसे मार्च 2026 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है।
कर्मचारियों के अधिकारों में सुधार
नए कानूनों के तहत सभी कर्मचारियों को अब नियुक्ति पत्र अनिवार्य रूप से मिलेगा, जिससे रोजगार की औपचारिक मान्यता सुनिश्चित होगी। समान काम के लिए समान वेतन और महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए गए हैं। महिलाएं अब सुरक्षित शिफ्टों में काम कर सकेंगी और 40 वर्ष से ऊपर के कर्मचारियों को मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच का अधिकार भी मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रावधान
अतिरिक्त काम के घंटे अब पूरी तरह से रेगुलराइज्ड होंगे। उद्योग अपने काम के उतार-चढ़ाव के अनुसार कर्मचारियों को अतिरिक्त घंटे पर काम देने में सक्षम होंगे, जबकि श्रमिकों को इसके लिए उचित मुआवजा मिलेगा। यह कदम कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के लिए संतुलित और पारदर्शी व्यवस्था प्रदान करता है।

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