राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों में पराली जलाने से बचें और इसके वैज्ञानिक उपयोग को अपनाएं। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से न केवल प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है, जिससे भविष्य की फसल पर असर पड़ता है।
आधुनिक मशीनों पर मिलेगा बड़ा अनुदान
आपको बता दें की सरकार द्वारा कई प्रकार के कृषि यंत्रों पर 40% से लेकर 80% तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसमें विशेष रूप से स्ट्रॉ रीपर और स्ट्रॉ बेलर जैसी मशीनों को शामिल किया गया है, जो पराली प्रबंधन में काफी उपयोगी मानी जाती हैं।
स्ट्रॉ रीपर पर सामान्य वर्ग के किसानों को लगभग 40% तक सहायता दी जाएगी, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को इससे अधिक लाभ मिलेगा। स्ट्रॉ बेलर (रेक सहित) पर सामान्य किसानों को 75% तक और एससी/एसटी वर्ग को 80% तक अनुदान दिया जा रहा है। अन्य उन्नत बेलर मशीनों पर भी अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है।
पराली से अब बनेगा अतिरिक्त लाभ
इन मशीनों के इस्तेमाल से खेतों में बची फसल अवशेष को बेकार नहीं जाना पड़ेगा। स्ट्रॉ रीपर जहां अवशेष को काटकर भूसे में बदल देता है, वहीं स्ट्रॉ बेलर उसे गट्ठरों के रूप में तैयार कर देता है। इससे किसान इसे पशु चारे या अन्य उपयोग के लिए बेच सकते हैं, जिससे उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनता है। सरकार की यह योजना इस समस्या का स्थायी समाधान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहेगी।
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