समझौते का विवरण
इस समझौते को कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय फाउंडेशन, कलाम एसपीएस रिसर्च सेंटर और रूस की जियोस्कैन ग्रुप ने मिलकर लागू किया। इंडो-रूस इनोप्रैक्टिका टेक्नोलॉजी हब के साथ इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही ड्रोन और सैटेलाइट सर्टिफिकेशन कोर्स की भी शुरुआत हुई है।
रूस के राजदूत का संदेश
भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने इसे द्विपक्षीय सहयोग का ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि CSJMU परिसर में UAV लैब की स्थापना भारत-रूस तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देगी। यह पहल दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान तय द्विपक्षीय तकनीकी एजेंडे का हिस्सा है।
एमओयू के उद्देश्य
भारत में ड्रोन और स्पेस टेक्नोलॉजी को मजबूत करना
छात्रों और युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण देना
UAV डिजाइन, फ्लाइट ऑपरेशन और डेटा एनालिटिक्स में रिसर्च को बढ़ावा देना
भारत-रूस के बीच तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ करना
महत्व और असर
यह समझौता न केवल रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएगा, बल्कि AI आधारित ड्रोन तकनीक और नागरिक ड्रोन सेक्टर में भी भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। इससे भविष्य में तकनीकी शोध, रक्षा और शिक्षा में दोनों देशों के युवाओं को लाभ मिलेगा।

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