केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान: देशभर के किसानों को खुशखबरी, चिंता दूर!

नई दिल्ली। देशभर के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि खेती के लिए जरूरी उर्वरक खासतौर पर यूरिया और डीएपी नियंत्रित कीमतों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं और उनकी आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सरकार का कहना है कि किसानों को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए पहले से ही व्यापक तैयारी की गई है।

हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि वैश्विक परिस्थितियों का असर भारत पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, कच्चे माल की कीमतों में उछाल और माल ढुलाई महंगी होने के कारण उर्वरकों की लागत बढ़ी है। साथ ही, घरेलू स्तर पर यूरिया उत्पादन भी कुछ हद तक प्रभावित हुआ है, जिससे आयात पर निर्भरता बनी हुई है।

सऊदी अरब के साथ दीर्घकालिक समझौता

उर्वरकों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत ने दीर्घकालिक रणनीति अपनाई है। इसी के तहत भारतीय कंपनियों और सऊदी अरब की एक बड़ी उर्वरक कंपनी के बीच पांच साल का समझौता किया गया है। इस करार के जरिए 2025-26 से 2029-30 तक हर साल बड़ी मात्रा में डीएपी और एनपीके उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को समय पर खाद मिलने में मदद मिलेगी और बाजार में अनिश्चितता कम होगी।

आयात के स्रोतों में विविधता

भारत ने सिर्फ एक या दो देशों पर निर्भर रहने के बजाय उर्वरक आयात के स्रोतों को भी बढ़ाया है। रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया, मिस्र, इंडोनेशिया, मलेशिया और कनाडा जैसे देशों से उर्वरक खरीदे जा रहे हैं। इस रणनीति का उद्देश्य है कि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर देश में आपूर्ति प्रभावित न हो।

भंडारण और तैयारी पर जोर

अप्रैल और मई को आमतौर पर उर्वरकों के भंडारण का समय माना जाता है। सरकार ने इस अवधि को ध्यान में रखते हुए पहले से ही स्टॉक तैयार कर लिया है, ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।

ईंधन आपूर्ति भी नियंत्रण में

उधर, पेट्रोलियम क्षेत्र में भी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एलएनजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। हाल के दिनों में एलपीजी की मांग बढ़ने के बावजूद अधिकतर डिलीवरी समय पर पूरी की गई है। सरकार जमाखोरी और कालाबाजारी पर भी सख्ती दिखा रही है। 

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