देश का पहला रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट प्लांट
इन प्रोजेक्ट्स में सबसे अहम है भारत का अपना पहला रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट प्लांट, जो पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगा। यह यूनिट खनिजों के शोधन से लेकर मैग्नेट तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया को देश में स्थापित करेगी। वर्तमान में वैश्विक सप्लाई में केवल कुछ ही देशों का वर्चस्व है, लेकिन इस प्लांट के शुरू होने से भारत अपनी घरेलू मांग का लगभग 25% हिस्सा खुद पूरा कर सकेगा।
प्रोडक्ट सेगमेंट और राज्यवार विस्तार
सरकार ने केवल मैग्नेट तक सीमित नहीं रहते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स के कई जरूरी कंपोनेंट्स के लिए भी अनुमोदन दिया है। इनमें लिथियम-आयन बैटरी सेल, फ्लेक्सिबल पीसीबी, कनेक्टर्स और डिस्प्ले मॉड्यूल जैसे महत्वपूर्ण प्रोडक्ट्स शामिल हैं। ये सभी प्रोजेक्ट्स देश के आठ राज्यों में स्थापित होंगे, जिसमें कर्नाटक और महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रोजेक्ट्स के साथ अग्रणी हैं।
रोजगार और उत्पादन में वृद्धि
इन 29 प्रोजेक्ट्स के माध्यम से बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाने और रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, इन निवेशों से लगभग 84,515 करोड़ रुपये का उत्पादन और 14,000 से अधिक नई नौकरियां सीधे तौर पर पैदा होंगी। इससे न केवल आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा, बल्कि तकनीकी कौशल वाले युवाओं के लिए अवसर भी बढ़ेंगे।
आत्मनिर्भरता की दिशा
आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में स्थानीयकरण और आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। उदाहरण के लिए, लिथियम-आयन बैटरी में 61% तक और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) में 50% तक स्थानीय उत्पादन को सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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