पश्चिम चंपारण के सांसद संजय जायसवाल ने बताया कि DPR नेपाल सरकार को सौंप दी गई है और दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल में नई सरकार बनने के बाद इस परियोजना को जल्द मंजूरी मिल सकती है, जिससे बिहार के लोगों के लिए नई रेल सुविधा जल्द साकार होगी।
परियोजना का विवरण
DPR के अनुसार, बिहार के रक्सौल से काठमांडू तक रेल लाइन की कुल लंबाई लगभग 136 किलोमीटर होगी। नेपाल की पहाड़ी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए लाइन के निर्माण में 39 सुरंगें, 41 बड़े पुल, 259 छोटे पुल, 32 रोड ओवरब्रिज, और 53 अंडरपास शामिल होंगे। अनुमानित लागत 60–70 हजार करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है।
भारत-नेपाल कनेक्टिविटी
इस रेल परियोजना का मुख्य उद्देश्य केवल रक्सौल और काठमांडू को जोड़ना नहीं है। भविष्य में इसे दिल्ली से काठमांडू तक सीधी रेल कनेक्टिविटी का मार्ग भी बनाया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच यात्रा और व्यापार दोनों में नया आयाम जुड़ सके।
प्रस्तावित स्टेशन और सुविधाएं
रक्सौल से काठमांडू के बीच कुल 13 स्टेशन विकसित किए जाएंगे, जिनमें प्रमुख हैं: रक्सौल, वीरगंज, बगही, पिपरा, डुमरवाना, चंद्रपुर, शिखरपुर, सिसनेरी और काठमांडू। इस नई रेल लाइन से यात्रियों को तेज़ और आरामदायक सेवा मिलेगी।
इससे व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
वर्तमान में रक्सौल से लगभग 6 किलोमीटर दूर नेपाल के वीरगंज स्थित सिरिसिया ड्राई पोर्ट से मालगाड़ियां चलती हैं। नई रेल लाइन बनने के बाद भारत और नेपाल के बीच माल परिवहन और व्यापार तेज़ और आसान हो जाएगा। इस परियोजना से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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