हालिया सर्वे के आंकड़ों पर नजर डालें तो मुख्य टक्कर वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन के बीच दिखाई दे रही है। वाम मोर्चा को लगभग 61 से 71 सीटें मिलने का अनुमान है, वहीं कांग्रेस गठबंधन 58 से 69 सीटों के बीच रह सकता है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दोनों के बीच अंतर बहुत कम है और मामूली बढ़त भी सरकार बनाने में निर्णायक साबित हो सकती है।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की स्थिति को लेकर भी दिलचस्प संकेत सामने आए हैं। भले ही पार्टी अभी सत्ता की दौड़ में सबसे आगे नहीं दिख रही, लेकिन उसके वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, जो करीब 18.95 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। सीटों की बात करें तो कुछ सर्वे उसे 2 सीटें दे रहे हैं, जबकि कुछ आकलनों में 6 सीटों तक कड़ा मुकाबला बताया गया है। दिलचस्प बात यह है कि एक सर्वे में 33.3 प्रतिशत लोगों ने बीजेपी को 10 से अधिक सीटें मिलने की संभावना जताई, जबकि लगभग उतने ही लोग उसे शून्य पर भी देख रहे हैं।
राज्य की कुछ सीटों पर बीजेपी की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है। नेमम सीट पर पार्टी को करीब 43 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने का अनुमान है, जबकि मलंपुझा, मंजेश्वरम और कझाकुट्टम जैसे क्षेत्रों में भी वह मजबूत चुनौती पेश कर सकती है। इसके अलावा त्रिशूर लोकसभा सीट पर मिली हालिया सफलता ने पार्टी के आत्मविश्वास को बढ़ाया है, जिसका असर विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहता है, तो बीजेपी की छोटी संख्या में सीटें भी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी सीधे सत्ता में न होते हुए भी सरकार गठन के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

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