बैंक लॉकर में रखी चीजों पर नजर नहीं
लोकसभा में कांग्रेस सांसद किरसन नामदेव के सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि ग्राहकों के लॉकर में रखी गई वस्तुओं की जांच करना या उनका रिकॉर्ड रखना बैंकिंग नियमों के खिलाफ होगा। इसलिए बैंक किसी लॉकर में रखे सामान की कीमत, प्रकार या मूल्य का आकलन नहीं करेगा।
निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया, “किसी ग्राहक के लॉकर में रखी चीज़ों पर नजर रखना बैंकिंग नियमों का उल्लंघन है। इसलिए बैंक ऐसा नहीं करेगा।”
नुकसान या लॉकर टूटने की स्थिति में मुआवजा
फाइनेंस मिनिस्टर ने यह भी बताया कि अगर किसी लॉकर में रखी चीज़ें नुकसान में आती हैं या लॉकर टूट जाता है, तो मुआवजा सालाना किराये का 100 गुना तय किया गया है। इसका मतलब यह है कि किसी भी लॉकर में रखी वस्तु का नुकसान होने पर बैंक उसी मानक के अनुसार मुआवजा देगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्योंकि बैंक को लॉकर में रखी वास्तविक वस्तुओं की जानकारी नहीं होती, इसलिए अलग-अलग लॉकरों के लिए अलग बीमा या मुआवजा देना संभव नहीं है।
बीमा कवर पर सीमा
वित्त मंत्री ने कहा कि ग्राहकों के लॉकर में रखी वस्तुओं के लिए कोई विशेष बीमा कवरेज उपलब्ध नहीं होगा। केवल मानक कवरेज के तहत सालाना किराये का 100 गुना मुआवजा मिलेगा। इसका उद्देश्य लॉकर धारकों को नुकसान की स्थिति में तत्काल वित्तीय राहत देना है।
रिटायर और निवेशक दोनों के लिए राहत
यह नियम उन लोगों के लिए खास राहत है जो लॉकर में मूल्यवान दस्तावेज़ या जेवर रखते हैं। अब उन्हें चिंता नहीं करनी पड़ेगी कि बैंक उनके लॉकर में रखी चीज़ों की निगरानी करेगा या मूल्य का आकलन करेगा।
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