इस बार नवरात्र के पहले दिन एक विशेष और दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। घटस्थापना के समय चैत्र अमावस्या का प्रभाव रहने के कारण यह योग काफी शक्तिशाली माना जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सभी पवित्र तीर्थों का वास होता है, इसलिए नवरात्र में इसकी स्थापना घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
प्रतिपदा तिथि और विशेष संयोग
पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 6 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च सुबह 5 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या तिथि में होने के कारण घटस्थापना के समय अमावस्या का प्रभाव भी माना जाएगा। बताया जाता है कि ऐसा संयोग कई दशकों बाद बन रहा है। नवरात्र के पहले दिन तीन शुभ योग भी बनेंगे, जिनका धार्मिक दृष्टि से खास महत्व माना जाता है।
कलश स्थापना का शुभ समय
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के लिए सुबह का समय विशेष शुभ माना गया है। पहला शुभ समय सुबह 6:41 से 7:24 बजे तक रहेगा। इसके अलावा दोपहर में अभिजीत मुहूर्त लगभग 11:33 से 12:22 बजे तक रहेगा। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इन समयों में घटस्थापना कर सकते हैं।
नौ दिनों का पूजा क्रम
चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
पहला दिन (19 मार्च) – मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना
दूसरा दिन (20 मार्च) – मां ब्रह्मचारिणी की आराधना
तीसरा दिन (21 मार्च) – मां चंद्रघंटा की पूजा
चौथा दिन (22 मार्च) – मां कुष्मांडा की आराधना
पांचवां दिन (23 मार्च) – मां स्कंदमाता की पूजा
छठा दिन (24 मार्च) – मां कात्यायनी की आराधना
सातवां दिन (25 मार्च) – मां कालरात्रि की पूजा
आठवां दिन (26 मार्च) – मां महागौरी की आराधना
नौवां दिन (27 मार्च) – मां सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन
नवरात्र का धार्मिक महत्व
नवरात्र का पर्व शक्ति, भक्ति और आत्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है। इन दिनों भक्त उपवास रखकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं और घर-घर में पूजा-पाठ का विशेष आयोजन होता है। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से देवी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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