कब होगा शामिल
नौसेना के अनुसार, 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में इस युद्धपोत को औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा। इस मौके पर राजनाथ सिंह इसे नौसेना को समर्पित करेंगे।
प्रोजेक्ट 17A का हिस्सा
INS तारागिरी, नीलगिरी क्लास के सात एडवांस गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स में से एक है। इससे पहले INS नीलगिरी, हिमगिरी और उदयगिरी को भी नौसेना में शामिल किया जा चुका है। यह पूरा प्रोजेक्ट भारत को 2047 तक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
क्या हैं INS तारागिरी की खासियतें
यह युद्धपोत अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस है:
एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए लंबी दूरी की मिसाइलें, जैसे बराक-8
आधुनिक सोनार, मल्टी-फंक्शन रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम
हेलिकॉप्टर हैंगर, जिसमें दो हेलिकॉप्टर एक साथ तैनात किए जा सकते हैं
ब्रह्मोस मिसाइल से लैस, जो दुश्मन के जहाजों को दूर से ही निशाना बना सकती है
एंटी-सबमरीन ऑपरेशन के लिए स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’ और रॉकेट लॉन्चर
इस हथियार की ताकत और क्षमता
करीब 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। यह लंबी दूरी से आने वाले खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और समय रहते निष्क्रिय करने में सक्षम है। इस युद्धपोत की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्वदेशी तकनीक है। इसके लगभग 75% उपकरण भारत में ही बने हैं और इसका डिजाइन भी भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।

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