राज्य में कुल 8053 ग्राम पंचायतें हैं और सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर पंचायत में एक व्यवस्थित मुक्तिधाम उपलब्ध हो। पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वित्तीय वर्ष 2026–27 के ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान (GPDP) में इस परियोजना को प्राथमिकता दी जाए।
हर पंचायत में बनेगा व्यवस्थित दाह स्थल
सरकार की योजना के अनुसार प्रत्येक पंचायत में ऐसा स्थान विकसित किया जाएगा जहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सम्मानपूर्वक पूरी की जा सके। लकड़ी से होने वाले पारंपरिक दाह संस्कार के लिए दाह गृह बनाया जाएगा और उसके ऊपर शेड की व्यवस्था होगी। इससे बारिश या तेज धूप के दौरान भी लोगों को कठिनाई नहीं होगी।
श्मशान घाटों में मिलेंगी जरूरी सुविधाएं
नए मुक्तिधामों को केवल दाह स्थल तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि वहां कई आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। योजना के तहत दाह स्थल को पेवर ब्लॉक से व्यवस्थित किया जाएगा ताकि जगह साफ-सुथरी बनी रहे। इसके अलावा वहां आने वाले लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था, शेड, पीने के पानी की सुविधा, शौचालय और स्नानागार भी बनाए जाएंगे।
अधिकांश पंचायतों में सर्वेक्षण पूरा
इस योजना को लागू करने से पहले राज्य सरकार ने श्मशान घाटों की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए सर्वे कराया है। अब तक करीब 7500 ग्राम पंचायतों में यह सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि बाकी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया जारी है। सर्वे के दौरान श्मशान घाट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे जमीन का प्रकार, खाता-खेसरा नंबर, भूमि का क्षेत्रफल और पंचायत का विवरण दर्ज किया जा रहा है। इससे निर्माण कार्य की योजना बनाने में आसानी होगी।
पंचायत स्तर पर होगी निगरानी
सरकार चाहती है कि मुक्तिधाम निर्माण को ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान में शामिल किया जाए ताकि पंचायत स्तर पर ही इसकी निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। इससे निर्माण कार्य में पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण ढांचे को मिलेगी मजबूती
इस पहल के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार की व्यवस्था पहले से अधिक व्यवस्थित और सम्मानजनक बन सकेगी। साथ ही यह योजना गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना के जरिए ग्रामीण समाज को एक ऐसी सुविधा मिलेगी, जो संवेदनशील परिस्थितियों में लोगों की परेशानियों को कम करने में सहायक होगी।
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