2953 शिक्षकों पर गिरी गाज
जांच के दौरान कुल 2953 शिक्षकों को दोषी पाया गया है। इनके खिलाफ पहले ही 1748 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। सरकार अब इन सभी को नौकरी से बर्खास्त करने के साथ-साथ अब तक मिली सैलरी और मानदेय की वसूली भी करेगी। यह वसूली ब्याज समेत की जाएगी, जिससे कुल रकम लगभग 1400 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
कई जिलों में फैला था फर्जीवाड़ा
जांच में यह भी सामने आया कि यह गड़बड़ी किसी एक जिले तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे राज्य में फैली हुई थी। नालंदा में सबसे ज्यादा 165 मामले सामने आए, जबकि मधुबनी में 145 केस दर्ज हुए, वहीं, पूर्णिया में 95 मामले पाए गए जबकि अररिया में सबसे कम 4 केस दर्ज किए गए। इससे स्पष्ट है कि शिक्षक बहाली प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई थीं।
ऐसे हुआ खुलासा
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब शिक्षक नियुक्तियों में गड़बड़ी की आशंका को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट के निर्देश पर विजिलेंस ब्यूरो को जांच सौंपी गई। करीब एक दशक तक चली इस जांच (2015 से फरवरी 2026) में लगभग 8 लाख दस्तावेजों की पड़ताल की गई। बिहार के 42 और राज्य के बाहर के 14 विश्वविद्यालयों से डिग्रियों का सत्यापन कराया गया।
जांच में सामने आईं चौंकाने वाली बातें
जांच के दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं—
गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों की डिग्रियां लगाई गईं
डुप्लीकेट मार्कशीट का इस्तेमाल हुआ
दूसरे व्यक्ति के नाम और रोल नंबर पर अपनी फोटो लगाकर नौकरी ली गई
एक ही डिग्री के आधार पर अलग-अलग जिलों में नौकरी करने के मामले भी सामने आए
आगे क्या होगा?
सरकार अब दोषी शिक्षकों को सेवा से हटाने के साथ-साथ आर्थिक वसूली की प्रक्रिया भी तेज करेगी। यह कार्रवाई आने वाले समय में शिक्षक भर्ती प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

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