इस योजना के तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में जमीन का नया रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे करोड़ों लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले के बाद अब शहरों में रहने वाले लोगों की जमीन का पूरा विवरण डिजिटल रूप में दर्ज किया जाएगा। इससे जमीन खरीद-बिक्री, नामांतरण, नक्शा सत्यापन और सरकारी योजनाओं में काफी आसानी आएगी।
किन-किन क्षेत्रों में होगा जमीन सर्वे
इस महाअभियान में राज्य के 19 नगर निगम, 89 नगर परिषद और 156 नगर पंचायत शामिल किए गए हैं। यानी बिहार के लगभग सभी बड़े और छोटे शहर इस योजना के दायरे में आएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि शहरी भूमि रिकॉर्ड को भी ग्रामीण क्षेत्रों की तरह व्यवस्थित और आधुनिक बनाया जाए।
ड्रोन तकनीक से तैयार होंगे नक्शे
भूमि सर्वेक्षण के दौरान अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ड्रोन मैपिंग और डिजिटल उपकरणों की मदद से हर प्लॉट की सही माप और सीमांकन किया जाएगा। इससे पुराने विवादित नक्शों और गलत रिकॉर्ड की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। नए सर्वे के बाद प्रत्येक जमीन का डिजिटल नक्शा और नया खतियान तैयार किया जाएगा। इससे लोगों को अपनी संपत्ति का प्रमाण सुरक्षित रखने में भी सुविधा होगी।
2 करोड़ लोगों को होगा लाभ
सरकार का मानना है कि इस योजना से राज्य की करीब 2 करोड़ शहरी आबादी को सीधा फायदा मिलेगा। वर्तमान समय में शहरों में जमीन विवाद, गलत रिकॉर्ड और नक्शों की गड़बड़ी बड़ी समस्या बनी हुई है। कई मामलों में एक ही जमीन पर कई दावे सामने आते हैं। डिजिटल रिकॉर्ड बनने के बाद ऐसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।
लोगों को क्या करना होगा
सर्वेक्षण के दौरान जमीन मालिकों को अपनी संपत्ति से जुड़ी सही जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसके लिए स्वघोषणा पत्र जमा करना पड़ सकता है, जिसमें जमीन का रकवा, चौहद्दी, खेसरा नंबर और वंशावली जैसी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा लोगों को अपने जरूरी दस्तावेज पहले से सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है, जैसे जमाबंदी की रसीद, पुराने खतियान की प्रति, जमीन खरीद-बिक्री के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य रिकॉर्ड।
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