सरकार का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत देना और सेवाओं को अधिक पारदर्शी व तेज बनाना है। सरकार की यह पहल प्रशासनिक सेवाओं को तेज, आसान और नागरिकों के अनुकूल बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
लखनऊ से हुई शुरुआत
इस नई व्यवस्था की शुरुआत राजधानी लखनऊ से कर दी गई है। आने वाले समय में प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर सहित अन्य नगर निगमों में भी इसे लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि धीरे-धीरे यह सुविधा प्रदेश के अधिक शहरों तक पहुंचाई जाएगी ताकि लोगों को जरूरी दस्तावेजों के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
आधे घंटे में पूरा होगा काम
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के अनुसार, वन डे गवर्नेंस सेंटर का मकसद लोगों के काम को एक ही दिन में पूरा करना है। उन्होंने बताया कि नागरिकों को अब कई दिनों या महीनों तक प्रमाणपत्र के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार का दावा है कि केंद्र पर पहुंचने के बाद बहुत कम समय में आवेदन प्रक्रिया पूरी कर प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए खास सुविधा
सरकार ने इस केंद्र में बुजुर्गों और डिजिटल सेवाओं का कम उपयोग करने वाले लोगों के लिए विशेष व्यवस्था करने की बात कही है। केंद्रों पर बैठने की सुविधा, चाय-पानी और सहायता डेस्क जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध रहेंगी। इससे वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोगों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
गुजरात मॉडल पर आधारित नई व्यवस्था
यह नई प्रणाली गुजरात में लागू किए गए 'वन डे गवर्नेंस सिस्टम' से प्रेरित है। अब उसी मॉडल को उत्तर प्रदेश में लागू किया जा रहा है ताकि प्रशासनिक सेवाओं को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाया जा सके।

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