बिहार में जमीन मालिकों की बल्ले-बल्ले! सरकार ने दी 4 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े मामलों में बड़ा बदलाव करते हुए राज्यवासियों को एक साथ कई राहतें दी हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भू-सर्वेक्षण, भूमि खरीद नीति और अन्य कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से जमीन व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और आधुनिक बनेगी।

1 .शहरी और ग्रामीण दोनों जगह होगा नया भू-सर्वेक्षण

अब बिहार में सिर्फ गांव ही नहीं, बल्कि शहरों में भी विशेष भू-सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसके तहत जमीन का नया खतियान और डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा। अभी तक यह काम मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में हो रहा था, लेकिन अब इसे नगर निकाय क्षेत्रों तक बढ़ाया जा रहा है, जिससे पूरे राज्य में एक समान भूमि रिकॉर्ड तैयार हो सके।

2 .जमीन रिकॉर्ड होगा ज्यादा पारदर्शी और आधुनिक

सरकार ने भू-सर्वेक्षण नियमों में कई बदलाव किए हैं। पुराने नियमों को संशोधित कर नए प्रावधान जोड़े गए हैं, जबकि कुछ अप्रासंगिक नियम हटा दिए गए हैं। इसके साथ ही जमीन से जुड़े तकनीकी शब्दों की स्पष्ट परिभाषा भी तय की जा रही है, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे। इससे भूमि रिकॉर्ड को अधिक सटीक और डिजिटल बनाने में मदद मिलेगी।

3 .नई भूमि खरीद नीति से जमीन मालिकों को राहत

राज्य सरकार ने लोकहित परियोजनाओं के लिए बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत यदि सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होती, तो किसानों और रैयतों से सीधे बातचीत कर जमीन खरीदी जाएगी। शहरी क्षेत्रों में जमीन का मूल्य बाजार दर या सर्किल रेट में जो अधिक होगा, उसके दोगुने के आधार पर तय किया जाएगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह मुआवजा चार गुना तक दिया जाएगा।

4 .जमीन खरीद पर नहीं लगेगा स्टांप शुल्क

सरकार ने एक और बड़ी राहत देते हुए तय किया है कि इस नई नीति के तहत जमीन खरीद पर कोई स्टांप शुल्क या पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे न केवल किसानों को बेहतर मुआवजा मिलेगा, बल्कि सड़क, पुल, अस्पताल और अन्य विकास कार्यों के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी हो सकेगी।

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