प्रदेश के किन कॉलेजों में शुरू होंगे पीजी कोर्स?
प्रस्ताव के अनुसार झांसी, बांदा, हंडिया (प्रयागराज), बरेली और मुजफ्फरनगर के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेजों में पीजी कोर्स शुरू किए जाएंगे। प्रत्येक कॉलेज में 20-20 सीटों का प्रस्ताव भेजा गया है। अगर इस योजना को मंजूरी मिलती है तो प्रदेश में आयुर्वेदिक परास्नातक की सीटों में बड़ा इजाफा होगा।
अभी सिर्फ तीन कॉलेजों में होती है पीजी पढ़ाई
फिलहाल उत्तर प्रदेश के आठ राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेजों में से केवल तीन कॉलेजों में ही पीजी कोर्स संचालित हो रहे हैं। इनमें लखनऊ, वाराणसी और पीलीभीत के कॉलेज शामिल हैं। सबसे अधिक 49 सीटें लखनऊ राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में हैं। इसके अलावा वाराणसी में 36 और पीलीभीत में छह सीटों पर परास्नातक की पढ़ाई होती है। ऐसे में हर साल बीएएमएस की पढ़ाई पूरी करने वाले सैकड़ों छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।
आयुर्वेदिक शोध को मिलेगा बढ़ावा
नए कॉलेजों में पीजी कोर्स शुरू होने से आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में रिसर्च और विशेषज्ञता को बढ़ावा मिलेगा। आयुर्वेदिक दवाओं और उपचार पद्धतियों पर बेहतर शोध हो सकेगा। इससे सर्दी, बुखार और जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज में एलोपैथी पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
ग्रामीण इलाकों को भी होगा फायदा
सरकार का मानना है कि आयुर्वेदिक शिक्षा मजबूत होने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी। अधिक विशेषज्ञ आयुर्वेदिक डॉक्टर तैयार होने से लोगों को वैकल्पिक चिकित्सा सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

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