सभी स्कूलों से मांगी गई विषयवार रिपोर्ट
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों से विषयवार शिक्षकों का विस्तृत डेटा एकत्र करें। यह जानकारी शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड की जाएगी, जिससे राज्य स्तर पर यह स्पष्ट हो सके कि किस स्कूल में कितने शिक्षक कार्यरत हैं और किन विषयों में कमी है।
प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक तक तय हुए नए मानक
नए नियमों के तहत अलग-अलग कक्षाओं के लिए शिक्षकों की संख्या और विषयवार संरचना तय की गई है।
कक्षा 1 से 5 तक के प्राथमिक विद्यालयों में सामान्यतः 4 शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे।
यदि छात्रों की संख्या अधिक होती है, तो प्रत्येक 35 छात्रों पर एक अतिरिक्त शिक्षक दिया जाएगा।
कक्षा 6 से 8 तक के विद्यालयों में 3 शिक्षकों का मानक निर्धारित किया गया है।
कक्षा 9 और 10 के लिए अधिकतम 8 शिक्षकों की व्यवस्था होगी।
इन मानकों का उद्देश्य हर कक्षा स्तर पर पर्याप्त शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराना है।
माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए अलग व्यवस्था
उत्क्रमित और नवस्थापित विद्यालयों में अधिकतम 6 शिक्षक रखने का प्रावधान किया गया है। इनमें सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान, भाषा, संगीत और शारीरिक शिक्षा जैसे विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षक शामिल होंगे।
वहीं, उच्च माध्यमिक विद्यालयों (कक्षा 11 और 12) में विज्ञान, कला, वाणिज्य, भाषा, कंप्यूटर और संगीत जैसे विषयों के आधार पर शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
राजकीय और प्रोजेक्ट विद्यालयों में अधिकतम 16 शिक्षक, जबकि उत्क्रमित एवं नवस्थापित विद्यालयों में अधिकतम 14 शिक्षक नियुक्त किए जा सकेंगे।
अतिरिक्त शिक्षक की मांग पर सख्त नियम
शिक्षा विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि जिन विद्यालयों में किसी विषय का शिक्षक पहले से मौजूद है, वहां उसी विषय में अतिरिक्त पद या शिक्षक की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है।
डेटा आधारित व्यवस्था से होगा सुधार
नई व्यवस्था में हर स्कूल का स्वीकृत बल, कार्यरत शिक्षक और आवश्यक शिक्षकों की संख्या का पूरा डाटा तैयार किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि किन विद्यालयों में वास्तव में शिक्षकों की कमी है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस डेटा आधारित प्रणाली से नियुक्ति और स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी।
शिक्षा कोष पोर्टल से बढ़ेगी पारदर्शिता
सभी जानकारी शिक्षा कोष पोर्टल पर अपडेट की जा रही है, जिससे राज्य स्तर पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। इससे भविष्य में शिक्षकों की भर्ती और पदस्थापन अधिक वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकेगा।

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