सरकार चाहती है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि छात्रों का समग्र विकास हो सके। इसी दिशा में 'रीडिंग आवर', 'समाचार पत्र पठन' और 'ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड' जैसे कार्यक्रमों को सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा।
प्रार्थना सभा में होगा समाचार वाचन
नए निर्देशों के अनुसार स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान नियमित रूप से समाचार वाचन कराया जाएगा। इससे बच्चों में जागरूकता बढ़ेगी और वे देश-दुनिया की घटनाओं से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही छात्रों को रोजाना पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि उनकी पढ़ने की आदत मजबूत हो सके।
लेखन और रचनात्मक गतिविधियां
सरकार ने छात्रों की अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ाने के लिए लेखन आधारित गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। स्कूलों में लेखन प्रतियोगिता, पुस्तक समीक्षा, कहानी लेखन और समाचार आधारित लेखन गतिविधियां कराई जाएंगी। इससे बच्चों की सोचने और समझने की क्षमता में सुधार होगा।
रीडिंग चैलेंज से बढ़ेगा बच्चों का उत्साह
शिक्षा विभाग ने 'सुपर-20' (प्राथमिक स्तर) और 'सुपर-30' (उच्च प्राथमिक स्तर) रीडिंग चैलेंज को भी आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस योजना के तहत तय संख्या में पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। जो छात्र सबसे अधिक पुस्तकें पढ़ेंगे, उन्हें 'चैंपियन रीडर ऑफ द ईयर' का पुरस्कार दिया जाएगा। इससे छात्रों में पढ़ने की प्रतिस्पर्धा और उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।
शिक्षा में बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सोचने-समझने में सक्षम बनाना है। यह नया रीडिंग अभियान छात्रों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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