यूपी सरकार का बड़ा फैसला, गांव वालों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने गांवों के विकास को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग की योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश देते हुए साफ कहा कि गांव और गरीब का विकास सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाए।

मंगलवार को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री ने गांवों में जल निकासी की मजबूत व्यवस्था करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गांवों की गलियां ग्रामीणों के लिए हाइवे की तरह होती हैं, इसलिए उन्हें साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखा जाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में सड़क, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए।

मनरेगा और आवास योजनाओं को मिलेगी गति

बैठक में मनरेगा के लंबित भुगतानों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के नए लक्ष्य के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए। सरकार चाहती है कि ग्रामीण गरीबों को जल्द से जल्द आवास और रोजगार योजनाओं का लाभ मिल सके।

महिलाओं को हर महीने मिलेगा प्रशिक्षण

उप मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि एक लाख दीदियों को हर महीने ग्राम्य विकास संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जाए। इसके लिए प्रशिक्षण कैलेंडर जारी करने और पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि महिला सामर्थ योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और सभी मंडलों में सरस मेले आयोजित कर ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जाए। इससे गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

ग्राम चौपालों को मिलेगा नया स्वरूप

सरकार अब ग्राम चौपालों को भी अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी में है। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि समाधान दिवस की तर्ज पर ग्राम चौपाल आयोजित की जाएं, जहां ग्रामीण अपनी समस्याएं सीधे अधिकारियों के सामने रख सकें। इसके लिए एक नया पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा, जिसमें शिकायत दर्ज करने से लेकर उसके निस्तारण तक की जानकारी ग्रामीणों को मिलेगी।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई

बैठक में अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया कि योजनाओं में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निष्क्रिय स्वयं सहायता समूहों को दोबारा सक्रिय करने और जांच से जुड़े मामलों का जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए गए।

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