प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। योजना को अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य राशन वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाना है।
क्या है 'सार्थक-पीडीएस' योजना?
सार्थक-पीडीएस यानी स्कीम फॉर असिस्टेंस इन राशन ट्रांसपोर्ट एंड हैंडलिंग-इनकम विद ऑटोमेशन इन पीडीएस एक ऐसी योजना है जिसके तहत राज्यों को खाद्यान्न के परिवहन, भंडारण और वितरण में आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। सरकार चाहती है कि राशन वितरण प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों को कम किया जाए और लाभार्थियों तक समय पर अनाज पहुंचे। इसी उद्देश्य से पीडीएस प्रणाली को डिजिटल और स्वचालित बनाया जा रहा है।
राशन दुकानों में बढ़ेगी पारदर्शिता
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि योजना के तहत राशन दुकानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा। इससे खाद्यान्न वितरण की निगरानी आसान होगी और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा राशन डीलरों के कमीशन में भी बढ़ोतरी की जाएगी ताकि वितरण प्रणाली को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके। सरकार का मानना है कि इससे राशन दुकानदारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा प्राप्त होगी।
राज्यों को मिलेगा आर्थिक सहयोग
इस योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों की एजेंसियों को खाद्यान्न ढुलाई, गोदाम प्रबंधन और वितरण से जुड़ी लागत में सहायता प्रदान करेगी। कई राज्यों में परिवहन और भंडारण की लागत अधिक होने के कारण राशन व्यवस्था पर दबाव रहता है। नई योजना से इस बोझ को कम करने की कोशिश की जाएगी।
80 करोड़ लोगों पर पड़ेगा सीधा असर
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित करता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत करोड़ों गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ते दर पर राशन उपलब्ध कराया जाता है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से लाभार्थियों तक अनाज पहुंचाने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनेगी। तकनीक आधारित निगरानी, बेहतर परिवहन व्यवस्था और आधुनिक सिस्टम लागू होने से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

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