बेसिक शिक्षा विभाग ने यह निर्णय जनगणना कार्य और शिक्षक समायोजन प्रक्रिया को देखते हुए लिया है। विभाग का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में तबादला प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। इसलिए फिलहाल शिक्षकों को इंतजार करना ही एकमात्र विकल्प है।
जनगणना कार्य बना बड़ी वजह
सरकारी जानकारी के अनुसार जनगणना का पहला चरण 20 जून 2026 तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण अगले वर्ष फरवरी में प्रस्तावित है। इसी दौरान बड़े प्रशासनिक संसाधन जनगणना कार्य में लगे रहेंगे। इसी कारण विभाग ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 31 मार्च 2026 तक तबादलों की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित रहेगी।
शिक्षकों में बढ़ी निराशा
प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक पिछले 10 से 15 वर्षों से अपने गृह जनपद से दूर तैनात हैं। ऐसे में हर साल तबादलों की उम्मीद लगाए बैठे शिक्षकों को इस फैसले से निराशा हुई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि परिवार से दूर रहने के कारण उन्हें निजी और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई संगठन लगातार सरकार से स्थायी और पारदर्शी तबादला नीति की मांग कर रहे हैं।
समायोजन प्रक्रिया पर भी असर
शिक्षक समायोजन को लेकर भी स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। सरकार को विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है। इसके बाद ही यह तय होगा कि किन जिलों में कितने शिक्षक अधिशेष हैं और उन्हें कहां समायोजित किया जाएगा।
कोर्ट के निर्देश भी अहम
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिशेष शिक्षकों की पहचान 'फर्स्ट इन-फर्स्ट आउट' सिद्धांत के आधार पर की जाए। यानी पहले नियुक्त होने वाले शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। कक्षा 6 से 8 तक के विषय शिक्षकों के मामले में यह व्यवस्था विषयवार लागू होगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी आपत्तियों का निस्तारण 20 जून तक पूरा किया जाए।
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