रूस ने भारत को दिया तगड़ा ऑफर, पाक के उड़े होश, चीन सन्न!

नई दिल्ली। भारत और रूस के रक्षा सहयोग को लेकर एक बार फिर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। रूस के शीर्ष टैंक डिजाइनर ने भारतीय सेना के पुराने और मौजूदा टैंकों को नई तकनीक से लैस करने का प्रस्ताव दिया है। इस पेशकश के बाद रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा होने लगा है कि आने वाले समय में भारत अपनी बख्तरबंद ताकत को किस स्तर तक ले जा सकता है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े टैंक ऑपरेटर देशों में गिना जाता है। भारतीय सेना के पास 3600 से अधिक रूसी मूल के टैंक मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या में T-72 अजेय और T-90 भीष्म शामिल हैं। अब इन्हें आधुनिक युद्ध के हिसाब से अपग्रेड करने की तैयारी पर चर्चा तेज हो गई है।

आधुनिक युद्ध ने बदल दी टैंकों की भूमिका

हाल के युद्धों ने यह दिखाया है कि अब पारंपरिक टैंक युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। ड्रोन हमले, एंटी-टैंक मिसाइल और हाईटेक निगरानी सिस्टम के कारण टैंकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान ड्रोन हमलों ने कई भारी टैंकों को निशाना बनाया, जिसके बाद दुनिया भर की सेनाएं अपने बख्तरबंद वाहनों को आधुनिक बनाने पर जोर दे रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में रूस ने भारत को नए सुरक्षा सिस्टम और उन्नत तकनीक देने की पेशकश की है।

रूस ने भारत को क्या ऑफर दिया?

रूस की प्रसिद्ध रक्षा डिजाइन संस्था से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञ Andrei Terlikov ने भारत के साथ तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग का प्रस्ताव रखा है। रूस चाहता है कि भारत के T-72 और T-90 टैंकों को आधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस किया जाए। इसमें ड्रोन हमलों से बचाव, नए फायर कंट्रोल सिस्टम और बेहतर सुरक्षा कवच जैसी तकनीक शामिल हो सकती है। रूस का दावा है कि T-90M आधुनिक युद्ध के लिए बेहद सक्षम टैंक है। यूक्रेन युद्ध से मिले अनुभवों के आधार पर रूस भारतीय T-90 भीष्म टैंकों को और ज्यादा घातक और सुरक्षित बनाना चाहता है।

भारत-रूस रक्षा संबंधों का पुराना इतिहास

भारत और रूस के बीच टैंक सहयोग नया नहीं है। 1990 के दशक में जब रूस आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब भारत ने T-90 टैंकों का बड़ा सौदा किया था। उस समय भारत ने सैकड़ों T-90 टैंकों का ऑर्डर देकर रूस की टैंक इंडस्ट्री को बड़ी राहत दी थी। बाद में दोनों देशों के बीच तकनीक हस्तांतरण समझौता हुआ, जिसके तहत चेन्नई स्थित फैक्ट्री में टैंकों का निर्माण शुरू हुआ। आज भारत में बड़ी संख्या में T-90 टैंक स्थानीय स्तर पर बनाए जा चुके हैं।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल रूस की यह पेशकश रक्षा सहयोग के नए चरण के रूप में देखी जा रही है। यदि दोनों देशों के बीच समझौता आगे बढ़ता है तो भारतीय सेना के टैंक बेड़े में बड़े तकनीकी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आने वाले वर्षों में भारत का फोकस सिर्फ टैंकों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उन्हें स्मार्ट और आधुनिक बनाने पर भी रहेगा।

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