1 .शहरी क्षेत्रों में भी होगा विशेष भू-सर्वेक्षण
अब तक बिहार में विशेष भू-सर्वेक्षण का काम मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन नए निर्णय के तहत इसे शहरी इलाकों तक भी विस्तार दिया जाएगा। इसके लिए बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त नियमावली में संशोधन किया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से शहरों में भी जमीन के रिकॉर्ड व्यवस्थित, आधुनिक और अधिक पारदर्शी बन सकेंगे। इससे नक्शों और खतियान से जुड़ी पुरानी विसंगतियों को दूर करने में मदद मिलेगी।
2 .जमीन रिकॉर्ड होंगे अधिक सटीक और डिजिटल
नए नियमों के तहत भूमि सर्वेक्षण प्रक्रिया को और सरल तथा तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। कई पुराने प्रावधानों को हटाकर नए नियम जोड़े गए हैं, जिससे कामकाज में तेजी आएगी। इसके साथ ही भूमि से जुड़े विभिन्न शब्दों और प्रक्रियाओं की स्पष्ट परिभाषा तय की जाएगी, ताकि किसी भी तरह का भ्रम या विवाद न पैदा हो।
3 .विकास परियोजनाओं के लिए नई भूमि खरीद नीति
सरकार ने सार्वजनिक हित की परियोजनाओं जैसे सड़क, अस्पताल, स्कूल और पुल आदि के लिए भूमि अधिग्रहण को आसान बनाने के उद्देश्य से नई भूमि खरीद नीति लागू करने का निर्णय लिया है। अगर किसी परियोजना के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होगी, तो रैयतों से आपसी सहमति के आधार पर सीधे जमीन खरीदी जाएगी।
4 .मुआवजे की नई व्यवस्था: जमीन मालिकों को बड़ा लाभ
नई नीति के तहत जमीन मालिकों को बेहतर मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। शहरी क्षेत्रों में जमीन का मूल्य सर्किल रेट या बाजार मूल्य में जो अधिक होगा, उसका दोगुना दिया जाएगा। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह मुआवजा चार गुना तक हो सकता है। सरकार का कहना है कि इससे जमीन मालिकों को उचित लाभ मिलेगा और विवादों में भी कमी आएगी।
5 .कैबिनेट ने स्टांप और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट का प्रवधान किया
इस नई व्यवस्था के तहत खरीदी जाने वाली जमीन पर स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे न केवल प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि सरकारी परियोजनाओं को भी तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे एक तरफ प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, वहीं दूसरी तरफ जमीन मालिकों को बेहतर मुआवजा और सुविधाएं भी मिलेंगी।
.png)
0 comments:
Post a Comment