CM सम्राट के निर्देश, बिहारवासियों के लिए 5 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के 211 ऐसे प्रखंडों में, जहां अभी तक डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई से इन प्रखंडों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू की जाएं, ताकि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े।

यह निर्देश लोक सेवा आवास, 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ में हुई उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिया गया। बैठक में राज्य की शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों की स्थिति और चल रही योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।

1 .211 प्रखंडों में शिक्षा की नई शुरुआत

सरकार का लक्ष्य है कि जिन प्रखंडों में अब तक डिग्री कॉलेज की सुविधा नहीं थी, वहां जल्द से जल्द उच्च शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए नए महाविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने के लिए आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति के लिए एक कमेटी बनाने और वैकेंसी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

2 .छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई व्यवस्था से ग्रामीण और दूरदराज के छात्रों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें डिग्री कोर्स के लिए दूसरे जिलों या शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे न केवल समय और खर्च की बचत होगी, बल्कि लड़कियों की उच्च शिक्षा में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

3 .ओपन यूनिवर्सिटी पर भी जोर

बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि देश के अन्य राज्यों में चल रहे ओपन यूनिवर्सिटी मॉडल का अध्ययन किया जाए। इसके आधार पर बिहार में भी ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिससे विश्वविद्यालयों पर बढ़ता बोझ कम हो और ज्यादा छात्रों को शिक्षा का अवसर मिल सके।

4 .शिक्षा संस्थानों को नई पहचान

सरकार ने यह भी निर्देश दिया कि वित्तरहित महाविद्यालयों की स्थिति का आकलन किया जाए, जिसमें भवन, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्रों की संख्या शामिल हो। इसके आधार पर आगे की योजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि जिन लोगों ने महाविद्यालयों के लिए भूमि दान दी है या सहयोग किया है, उनके नाम पर संस्थानों का नामकरण किया जा सकता है।

5 .शोध और विश्वविद्यालयों में सुधार

उच्च शिक्षा को और मजबूत बनाने के लिए शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों के पुनर्गठन पर भी जोर दिया गया है। सरकार चाहती है कि रिसर्च सेंटर अधिक व्यवस्थित और विशेषज्ञता आधारित हों, ताकि नीति निर्माण और विकास योजनाओं में उनका बेहतर उपयोग हो सके।

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