यूपी में छात्राओं के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार ने दिए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्राओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी उच्च प्राथमिक विद्यालयों, कंपोजिट स्कूलों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं को माहवारी स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि किशोरियों में जागरूकता बढ़े और वे बिना झिझक अपनी सेहत का ध्यान रख सकें।

हर स्कूल में बनेगा एमएचएम क्लब

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक विद्यालय में 'एमएचएम क्लब' यानी माहवारी स्वच्छता प्रबंधन क्लब का गठन किया जाएगा। इसमें 10 से 12 छात्राओं को शामिल किया जाएगा, जो अन्य छात्राओं को सुरक्षित माहवारी प्रबंधन, साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी देंगी। इन क्लबों का संचालन मीना मंच की सुगमकर्ता करेंगी और हर पखवाड़े बैठक आयोजित की जाएगी।

स्कूलों में बनेगा पैड बैंक

सरकार ने छात्राओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में पैड बैंक बनाने का भी फैसला किया है। यहां जरूरत पड़ने पर छात्राओं को मुफ्त सेनेटरी पैड, इनर वियर, अतिरिक्त यूनिफॉर्म और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए स्कूलों को कंपोजिट ग्रांट से खर्च करने की अनुमति दी गई है। साथ ही पैड वितरण का पूरा रिकॉर्ड रखने के लिए अलग रजिस्टर भी बनाया जाएगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ होंगे संवाद

हर महीने विद्यालयों में डॉक्टर, एएनएम और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में मासिक धर्म से जुड़े मिथकों, एनीमिया, पोषण, स्वच्छता और सुरक्षित निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। सरकार ने जुलाई से अप्रैल तक अलग-अलग गतिविधियों का कैलेंडर भी तैयार किया है ताकि पूरे वर्ष छात्राओं को नियमित रूप से जागरूक किया जा सके।

स्कूलों में बेहतर सुविधाओं पर जोर

निर्देशों के अनुसार सभी विद्यालयों में बालिका शौचालय, साफ पानी, डस्टबिन, इंसीनरेटर और पर्याप्त मात्रा में सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे छात्राओं को स्कूलों में बेहतर और सुरक्षित माहौल मिल सकेगा। इस योजना की निगरानी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला समन्वयक बालिका शिक्षा द्वारा की जाएगी।

छात्राओं के आत्मविश्वास को मिलेगा बढ़ावा

सरकार की इस पहल को छात्राओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि माहवारी से जुड़े संकोच और गलत धारणाओं को दूर करने से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उनकी स्कूल में उपस्थिति भी बेहतर होगी।

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