1. अब शहरों में भी होगा जमीन सर्वे
अब तक राज्य में मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन सर्वे का काम चल रहा था, लेकिन नए फैसले के बाद शहरी क्षेत्रों में भी स्पेशल लैंड सर्वे कराया जाएगा। इसके तहत शहरों की जमीन का नया नक्शा, खतियान और रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे जमीन की सही स्थिति स्पष्ट होगी और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
2. जमीन रिकॉर्ड होंगे पूरी तरह डिजिटल
सरकार अब जमीन सर्वे प्रक्रिया को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने जा रही है। पुराने रिकॉर्ड को अपडेट करके ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे। इससे लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और जमीन से जुड़े दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। डिजिटल रिकॉर्ड बनने से पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
3. जमीन विवाद कम होने की उम्मीद
बिहार में लंबे समय से जमीन विवाद बड़ी समस्या रहे हैं। कई मामलों में सही रिकॉर्ड और नक्शा नहीं होने के कारण विवाद बढ़ जाते हैं। सरकार का मानना है कि नए सर्वे के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि जमीन का वास्तविक मालिक कौन है। इससे अवैध कब्जे और फर्जी खरीद-बिक्री पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
4. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से आवेदन
सरकार ने सर्वे प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधाएं दी हैं। जमीन मालिकों को प्रपत्र-2 और प्रपत्र-3(ए) भरना होगा। प्रपत्र-2 में जमीन से जुड़ी जानकारी देनी होगी, जबकि प्रपत्र-3(ए) में परिवार की वंशावली दर्ज करनी होगी। लोग फॉर्म अंचल कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं या फिर भू-राजस्व विभाग पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं।
5 .कौन-कौन से दस्तावेज होंगे जरूरी?
सर्वे प्रक्रिया में जमीन मालिकों को खतियान, केवाला (डीड), रसीद और जमाबंदी जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा। यह सर्वे सिर्फ रिकॉर्ड सुधार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की शहरी विकास योजनाओं में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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