पर्यटन विभाग के अनुसार अब तक करीब 3000 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि लगभग 900 होम स्टे और फार्म स्टे का पंजीकरण पूरा हो चुका है। वर्ष 2026 की शुरुआत के बाद से इस सेक्टर में और अधिक तेजी देखने को मिल रही है।
1. पर्यटन और रोजगार को मिलेगी बड़ी खुशखबरी
नई नीति से सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि छोटे शहरों और गांवों में रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। स्थानीय लोग अपने घरों को होम स्टे के रूप में विकसित कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है। यह मॉडल खासकर युवाओं और छोटे व्यवसायियों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है, क्योंकि बिना बड़े निवेश के भी वे पर्यटन से जुड़कर कमाई कर सकते हैं।
2. धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों में बढ़ेगा पर्यटन
वाराणसी, मथुरा, आगरा, अयोध्या, प्रयागराज और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में होम स्टे और फार्म स्टे की मांग लगातार बढ़ रही है। इन शहरों में आने वाले पर्यटकों को अब होटल के अलावा स्थानीय संस्कृति से जुड़े ठहरने के विकल्प मिल रहे हैं। इससे पर्यटकों को स्थानीय जीवनशैली को करीब से समझने का अवसर मिलेगा और पर्यटन अनुभव भी अधिक व्यक्तिगत और आरामदायक होगा।
3. ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा होम स्टे मॉडल
नई नीति का सबसे सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र में ग्रामीण होम स्टे मॉडल तेजी से विकसित हो रहा है। यहां स्थानीय लोग अपने घरों को पर्यटकों के लिए उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। साथ ही ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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