CM सम्राट ने दिए निर्देश: बिहार में 2 घंटे ज्यादा होगी पानी की सप्लाई

पटना। बिहार में आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा सुधारात्मक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हर घर नल का जल योजना के तहत पानी की सप्लाई अब सुबह और शाम एक-एक घंटे बढ़ाई जाए।

इस फैसले के बाद राज्य में लोगों को कुल मिलाकर 2 घंटे अतिरिक्त पानी की सुविधा मिलेगी, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पेयजल संकट में राहत मिलने की उम्मीद है।

हर घर तक समय पर पानी पहुंचाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पेयजल आपूर्ति की उपलब्धता हर हाल में नियमित और निर्बाध रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पानी की आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार का लक्ष्य है कि हर घर तक साफ और पर्याप्त पानी समय पर पहुंचे और किसी भी इलाके में पानी की कमी की समस्या न रहे।

शिकायतों के समाधान में होगा AI का उपयोग

इस बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी दिया गया कि पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के समाधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाए। इससे शिकायतों की निगरानी, ट्रैकिंग और समाधान की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बन सकेगी। सरकार का मानना है कि तकनीक के उपयोग से जनता की समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

पानी की गुणवत्ता पर भी सख्त निगरानी

मुख्यमंत्री ने शुद्ध पेयजल आपूर्ति पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पानी की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके लिए हर दो से तीन महीने में पंचायत स्तर पर जांच कराने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही वार्ड स्तर पर भी नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि किसी भी स्तर पर दूषित पानी की आपूर्ति न हो।

मरम्मत और नए चापाकलों पर ध्यान

सरकार ने जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव पर भी जोर दिया है। जिन क्षेत्रों में आवश्यकता है, वहां 30 जून से पहले नए चापाकल लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में भी पेयजल सुविधा को बेहतर किया जा सकेगा।

भूजल संरक्षण पर भी फोकस

बैठक में भूजल संरक्षण योजनाओं की समीक्षा भी की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि भूजल स्तर की लगातार निगरानी की जाए और इसके लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए। सरकार का उद्देश्य है कि भविष्य में जल संकट की स्थिति न बने और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके।

0 comments:

Post a Comment