सरकार का मानना है कि इस नई नीति से सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल और अन्य विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। अक्सर सरकारी परियोजनाएं जमीन अधिग्रहण में देरी के कारण लंबे समय तक अटकी रहती हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार को समय पर जमीन उपलब्ध हो सकेगी और परियोजनाओं का काम तेजी से आगे बढ़ेगा।
रैयत से सीधे खरीदी जाएगी जमीन
नई नीति के अनुसार अब सरकार जमीन अधिग्रहण की लंबी प्रक्रिया के बजाय रैयतों से आपसी सहमति और बातचीत के आधार पर सीधे जमीन खरीद सकेगी। जमीन का हस्तांतरण निबंधित दस्तावेज के माध्यम से किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का दावा किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना तक मुआवजा
सरकार ने मुआवजा राशि को लेकर भी बड़ा प्रावधान किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का मूल्य बाजार दर या सर्किल रेट (एमवीआर) में जो अधिक होगा, उसका चार गुना तक भुगतान किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में बाजार मूल्य या सर्किल दर में जो अधिक होगा, उसका दो गुना मुआवजा दिया जाएगा। इससे जमीन मालिकों को पहले की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि
नई नीति के तहत सरकार ने एक और बड़ा लाभ देने का फैसला किया है। रैयतों को तय मुआवजा राशि के अलावा कुल कीमत का 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। यह राशि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के जमीन मालिकों को मिलेगी।
स्टाम्प और पंजीयन शुल्क से राहत
सरकार ने यह भी तय किया है कि इस नीति के तहत खरीदी जाने वाली जमीन पर स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया सस्ती और आसान हो जाएगी।
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