घर-घर जाकर होगा बच्चों का सर्वे
शिक्षा विभाग के अनुसार इस विशेष अभियान के तहत गृहवार सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसके जरिए उन बच्चों की पहचान की जाएगी जिनका अभी तक स्कूल में दाखिला नहीं हुआ है। इसके बाद संबंधित बच्चों का उनके क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में नामांकन कराया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को पत्र भेजकर अभियान को गंभीरता से चलाने के निर्देश दिए हैं। पत्र में साफ कहा गया है कि विद्यालय से बाहर रह रहे शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। विभाग इस अभियान की लगातार निगरानी भी करेगा।
पहले भी चला था 30 दिन का अभियान
नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में भी राज्य सरकार ने 30 दिनों का नामांकन अभियान चलाया था। इस दौरान खासतौर पर कक्षा 1, कक्षा 6 और कक्षा 9 में बच्चों का एडमिशन कराया गया था। लेकिन समीक्षा में सामने आया कि बड़ी संख्या में बच्चे अब भी स्कूलों से बाहर हैं। इसी वजह से सरकार ने अभियान की अवधि बढ़ाने का फैसला लिया है।
कम नामांकन वाले स्कूलों से मांगा जाएगा जवाब
शिक्षा विभाग अब उन विद्यालयों पर भी नजर रखेगा जहां पिछले साल की तुलना में इस बार कम नामांकन हुआ है। ऐसे स्कूलों से जवाब तलब किया जाएगा और यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
राज्य सरकार लगातार यह कोशिश कर रही है कि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही शिक्षा से जोड़ा जाए। खासकर ग्रामीण और कमजोर वर्ग के बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें और शिक्षा के महत्व को समझें।
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