डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रूबल
हाल के महीनों में रूसी मुद्रा रूबल ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेजी दिखाई है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्ट्स के अनुसार रूबल अप्रैल के बाद से करीब 12 प्रतिशत तक मजबूत हुआ है। यह पिछले दो वर्षों का सबसे मजबूत स्तर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद उसकी ऊर्जा निर्यात क्षमता कमजोर नहीं हुई। खासकर तेल और गैस की ऊंची कीमतों ने रूस की आय को सहारा दिया है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो रूस को सीधा फायदा मिलता है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक ऊर्जा निर्यात पर आधारित है।
युद्ध और तनाव से बढ़ी तेल की मांग
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। ऐसे हालात में दुनिया भर के देशों को तेल आपूर्ति प्रभावित होने का डर रहता है। इसी आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं।
रूस इस स्थिति का लाभ उठाने में सफल रहा है। भारत, चीन और कई एशियाई देशों को रूस लगातार तेल निर्यात कर रहा है। पश्चिमी देशों की पाबंदियों के बावजूद रूस ने नए बाजार तलाश लिए हैं, जिससे उसकी विदेशी मुद्रा आय लगातार बनी हुई है।
रूस की सख्त आर्थिक नीति बनी ताकत
रूबल को मजबूत बनाए रखने में रूस की केंद्रीय बैंक नीति का भी बड़ा योगदान माना जा रहा है। रूस ने ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा, जिससे घरेलू बाजार में विदेशी मुद्रा की मांग कम हुई। इसके अलावा सरकार ने पूंजी नियंत्रण और निर्यात आय को देश में लाने जैसे कदम उठाए।
अमेरिका के लिए बढ़ सकती है चुनौती
जानकारों के अनुसार अगर रूस लगातार मजबूत मुद्रा और ऊर्जा निर्यात के दम पर आर्थिक स्थिरता बनाए रखता है तो यह अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए चुनौती बन सकता है। अमेरिका लंबे समय से रूस की अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मौजूदा हालात रूस को राहत देते नजर आ रहे हैं।

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