राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निपटारे के लिए विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन किया है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन से जुड़े मामलों के समाधान में तेजी आएगी और लोगों को वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
मंत्री के निर्देश पर शुरू हुई नई व्यवस्था
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि शिकायतों के निपटारे में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दरअसल, विभाग में अधिकारियों के लगातार तबादले के कारण कई मामलों का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा था। इससे हजारों शिकायतें लंबित हो रही थीं और लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने मॉनिटरिंग सेल बनाने का फैसला लिया।
9 अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
नई मॉनिटरिंग सेल में राजस्व सेवा के 9 अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों का काम लंबित मामलों की निगरानी करना और तय समय सीमा के भीतर शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करना होगा। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे आईटी सिस्टम के जरिए हर शिकायत पर नजर रखें और किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रहने दें।
टेक्नोलॉजी से होगी निगरानी
सरकार इस व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए उप सचिव डॉ. सुनील कुमार को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं एनआईसी की मदद से ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे शिकायत दर्ज होने से लेकर समाधान तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जा सके। इससे लोगों को यह जानकारी मिलती रहेगी कि उनकी शिकायत किस स्तर पर लंबित है और उस पर क्या कार्रवाई हो रही है।
लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है, जिनके मामले लंबे समय से अटके हुए हैं। इनमें जमीन विवाद, नामांतरण, सीमांकन और खाता-खेसरा सुधार जैसे मामले शामिल हैं। अक्सर देखा जाता है कि इन मामलों में वर्षों तक सुनवाई चलती रहती है और लोगों को सरकारी दफ्तरों के लगातार चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब सरकार का लक्ष्य है कि हर शिकायत का समय पर और संतोषजनक समाधान किया जाए।
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