सफर होगा तेज और आरामदायक
अभी लखनऊ से कानपुर जाने में यात्रियों को उन्नाव के रास्ते भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है, जिससे 2 से 6 घंटे तक का समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यह दूरी लगभग एक घंटे से भी कम समय में तय की जा सकेगी। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों को 120 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने की अनुमति होगी, जिससे यात्रा बेहद तेज और सुगम हो जाएगी।
किन जिलों को होगा फायदा?
यह एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से लखनऊ, कानपुर और उन्नाव जिलों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। इन क्षेत्रों में ट्रैफिक दबाव कम होगा और औद्योगिक व व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसका रूट और संरचना
यह 63 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे कानपुर के आजाद चौराहा से शुरू होकर उन्नाव के कई गांवों जैसे दतौली, कांथा, तौरा, नैरोना और अमरसास होते हुए लखनऊ के बनी-बंथरा क्षेत्र तक पहुंचेगा। इसमें करीब 18 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड बनाया गया है। यह परियोजना ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पर विकसित की गई है, यानी यह पूरी तरह नई जमीन पर तैयार किया गया आधुनिक मार्ग है।
इसकी लागत और निर्माण
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगभग 4700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है, जिससे यह देश के प्रति किलोमीटर लागत के हिसाब से सबसे महंगे एक्सप्रेसवे में से एक बन गया है। यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग और तेज यातायात सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
इसपर टोल व्यवस्था
इस एक्सप्रेसवे पर चार टोल प्लाजा बनाए गए हैं। कार से एक तरफ का टोल लगभग 275 रुपये होगा, जबकि 24 घंटे के भीतर वापसी यात्रा करने पर कुल टोल 415 रुपये लगेगा। यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ यात्रा समय को कम करेगा बल्कि लखनऊ और कानपुर के बीच आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा। इससे व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
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