आयोग की बैठक में हुई अहम चर्चा
बुधवार को विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार की अध्यक्षता में राज्य सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पावर कारपोरेशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में उपभोक्ता परिषद ने दावा किया कि बिजली कंपनियों के पास करीब 51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस मौजूद है, ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि के बजाय कमी की जानी चाहिए।
उपभोक्ता परिषद का बड़ा दावा
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बैठक में कहा कि जब कंपनियों के पास भारी सरप्लस मौजूद है, तो बिजली दरें बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस सरप्लस का समायोजन किया जाए तो बिजली दरों में या तो एकमुश्त लगभग 45 प्रतिशत की कमी की जा सकती है या फिर अगले पांच वर्षों तक हर साल करीब 8 प्रतिशत की राहत दी जा सकती है।
24 घंटे बिजली आपूर्ति की मांग
बैठक में रोस्टर व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी उठाई गई। उपभोक्ता परिषद ने प्रदेशभर में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की। उनका कहना था कि जब उपभोक्ता लगातार बिल चुका रहे हैं, तो उन्हें पूरी और स्थिर बिजली आपूर्ति मिलनी चाहिए।
स्मार्ट मीटर पर विवाद
बैठक में स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इस योजना का लगभग 3,838 करोड़ रुपये का खर्च उपभोक्ताओं पर डालना अनुचित है। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार स्मार्ट मीटर योजना उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ के बिना लागू होनी चाहिए, लेकिन लागत में बढ़ोतरी के कारण उपभोक्ताओं पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

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