सात जिलों से होकर गुजरेगी यह अहम सड़क
यह सड़क बिहार के सात जिलों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजर रही है। इस परियोजना का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और लोगों की आवाजाही को आसान बनाना है।
554 किलोमीटर में से अधिकांश काम पूरा
परियोजना की कुल लंबाई 554 किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 538 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब केवल 16 किलोमीटर का काम शेष है, जिसे तेजी से पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्वी चंपारण और किशनगंज जिलों में कुछ हिस्सों का निर्माण अभी बाकी है।
हजारों करोड़ रुपये से तैयार हो रही सड़क
इस बड़ी परियोजना पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने मिलकर भारी निवेश किया है। केंद्र सरकार की ओर से लगभग 4000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि बिहार सरकार ने भूमि अधिग्रहण सहित 2800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लगाई है। यह निवेश क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
7 मीटर चौड़ी सड़क से सुगम होगा सफर
यह सड़क लगभग 7 मीटर चौड़ी बनाई जा रही है, जिससे वाहनों की आवाजाही सुगम होगी। भारत-नेपाल सीमा की कुल लंबाई में से अधिकांश हिस्सा इस परियोजना के तहत कवर किया जा रहा है, जबकि बाकी हिस्सा पहले से मौजूद राष्ट्रीय राजमार्गों के रूप में विकसित है।

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