बिहार सरकार के 3 बड़े फैसले, जमीन लेने वालों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में जमीन से जुड़े विवाद और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नए डिजिटल सिस्टम और पोर्टल की शुरुआत के साथ अब जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले से ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित हो जाएगी। सरकार का दावा है कि इस पहल से जमीन माफिया और जालसाजों पर सख्त लगाम लगेगी और आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

इस नए सिस्टम से रियल एस्टेट सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी। जमीन का रिकॉर्ड साफ और ऑनलाइन होने से संपत्ति खरीद-बिक्री में भरोसा बढ़ेगा। साथ ही बैंक भी आसानी से प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन कर सकेंगे, जिससे होम लोन और अन्य लोन प्रक्रिया सरल हो जाएगी। इससे राज्य में निवेश और विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।

1 .जमीन रजिस्ट्री में आएगी पूरी पारदर्शिता

सरकार द्वारा शुरू किए गए नए पोर्टल का मुख्य उद्देश्य जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। अब निबंधन और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को आपस में जोड़ दिया गया है। इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। पहले जहां एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने जैसे मामले सामने आते थे, अब ऐसी धोखाधड़ी पर रोक लगने की उम्मीद है।

2 .एक क्लिक में मिलेगा जमीन का पूरा रिकॉर्ड

नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब किसी भी जमीन की पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। कोई भी व्यक्ति खाता, खेसरा, जमाबंदी नंबर या डीड नंबर डालकर जमीन का पूरा रिकॉर्ड देख सकेगा। इसमें यह भी जानकारी मिलेगी कि जमीन का असली मालिक कौन है, वह पैतृक है या खरीदी हुई है और क्या उस पर कोई विवाद या केस चल रहा है। इससे खरीदार को पहले ही सचेत होने का मौका मिलेगा और गलत सौदे से बचा जा सकेगा।

3 .रजिस्ट्री के समय होगी तुरंत होगी जांच

नए डिजिटल सिस्टम के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब जैसे ही कोई व्यक्ति जमीन की रजिस्ट्री के लिए आवेदन करेगा, संबंधित अधिकारी ऑनलाइन डेटाबेस के जरिए सभी रिकॉर्ड की जांच करेंगे। अगर किसी तरह की गड़बड़ी या दोहरे दावे की स्थिति पाई जाती है, तो सिस्टम अपने आप उस रजिस्ट्री को रोक देगा। इसके साथ ही आधार वेरिफिकेशन और बायोमेट्रिक पहचान को भी अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे फर्जी पहचान के जरिए रजिस्ट्री की संभावना खत्म हो सके।

0 comments:

Post a Comment