भारत ने किया 'सूर्यास्त्र' रॉकेट का टेस्ट, ताकत ने सबसे चौकाया

नई दिल्ली। भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय निजी कंपनी NIBE लिमिटेड ने स्वदेशी ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट सिस्टम का सफल परीक्षण कर देश की सैन्य ताकत को नई मजबूती दी है। ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में 18 और 19 मई 2026 को इस रॉकेट का परीक्षण किया गया।

इस सफल टेस्ट के बाद भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को बड़ा बल मिला है। खास बात यह है कि सूर्यास्त्र रॉकेट की रेंज 150 किलोमीटर से लेकर 300 किलोमीटर तक बताई जा रही है, जो इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

NIBE लिमिटेड ने दावा किया है कि ‘SURYASTRA यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ का परीक्षण पूरी तरह सफल रहा। इसके साथ ही 150 किमी और 300 किमी रेंज वाले सटीक-निर्देशित रॉकेटों की क्षमता भी साबित हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और निजी कंपनियों की भूमिका भी मजबूत होगी।

दुश्मन के ठिकानों पर दूर से सटीक हमला

300 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता सूर्यास्त्र सिस्टम को बेहद खास बनाती है। यह रॉकेट दुश्मन की सीमा के अंदर मौजूद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, लॉजिस्टिक्स हब, रडार सिस्टम और कमांड सेंटर को निशाना बना सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसी कार्रवाई के लिए सेना को पूरी तरह बैलिस्टिक मिसाइलों या लड़ाकू विमानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे युद्ध के समय तेज और प्रभावी जवाब देने की क्षमता बढ़ेगी।

आधुनिक युद्ध की जरूरतों को करेगा पूरा

सूर्यास्त्र कार्यक्रम को भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी से सटीक हमला करने वाले हथियारों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यह सिस्टम भारतीय सेना के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। यह कार्यक्रम भारत के गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम और अन्य विकसित हो रहे टैक्टिकल मिसाइल प्रोग्राम को भी मजबूती देगा। आने वाले समय में यह सेना के स्वदेशी हथियारों के जखीरे का अहम हिस्सा बन सकता है।

भारतीय सेना को मिलेगा बड़ा फायदा

सूर्यास्त्र जैसे लंबी दूरी के रॉकेट सिस्टम भारतीय सेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा सकते हैं। इससे सीमावर्ती इलाकों में रणनीतिक बढ़त हासिल करने में मदद मिलेगी। अगर यह सिस्टम पूरी तरह सेना में शामिल होता है, तो भारत की रक्षा ताकत को नया आयाम मिल सकता है और देश की सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी।

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