सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह आयोग पांच सदस्यीय होगा और पंचायत निकायों में पिछड़े वर्ग की स्थिति, प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करेगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी कानूनी बाधा दूर हो गई है।
रिटायर्ड जस्टिस राम अवतार सिंह बने अध्यक्ष
सरकार ने आयोग की कमान रिटायर्ड जस्टिस राम अवतार सिंह को सौंपी है। उनके साथ चार अन्य सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है। आयोग में रिटायर्ड एडीजे ब्रजेश कुमार और संतोष विश्वकर्मा को सदस्य बनाया गया है। वहीं रिटायर्ड आईएएस अरविंद चौरसिया और एसपी सिंह को भी आयोग में शामिल किया गया है। सरकार की ओर से इन सभी की नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से छह महीने के लिए की गई है।
OBC आरक्षण पर तैयार होगी रिपोर्ट
यह आयोग पंचायत निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का अध्ययन करेगा। साथ ही यह देखा जाएगा कि पंचायत स्तर पर OBC वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व मिल रहा है और आरक्षण की आवश्यकता किस रूप में लागू की जानी चाहिए। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण का रास्ता तय होगा।
पंचायत चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि आयोग के गठन के बाद पंचायत चुनाव में देरी हो सकती है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी संकेत दिए हैं कि मौजूदा ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें प्रशासक समिति के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की बात कही गई है।
26 मई को खत्म हो रहा कार्यकाल
प्रदेश के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में सरकार के सामने पंचायत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की चुनौती है। यदि चुनाव समय पर नहीं होते हैं, तो प्रशासक समिति के जरिए पंचायतों का संचालन किया जा सकता है। इससे मौजूदा प्रतिनिधियों को कुछ समय तक अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है।

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